मन ही बंधन और मुक्ति का कारण है : बलूनी

कथा व्यास पंडित सूर्यकांत बलूनी

देहरादून। सरस्वती विहार विकास समिति एवं शिव शक्ति मंदिर प्रकोष्ठ अजबपुर खुर्द देहरादून द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित सूर्यकांत बलूनी ने कहा कि सभी कथाओं के उद्धारता गृहस्ती गुरु श्री शंकर जी हैं, तो संसार की कथादाता विरक्त गुरु श्रीनारद जी है. भागवत स्तर पर नारद भगवान के मन है तो जीव यही जीव स्तर पर जीव के मन है. मन ही बंधन व मुक्ति का कारण है. उन्होंने कहा कि मन ही माया, अज्ञान, कुसंग, जगत प्रभाव से प्रभावित होता है। वहीं दूसरी ओर मन ही ज्ञान सत्संग से जुड़कर ब्रह्मानंद होता है. इसलिए कथाओं में रामलीला में नारदमोह प्रसंग आता है और इसी मनरूपी नारद को वृंदावन में दुखी भक्ति और सत्यनारायण की कथा व राम कथा में सांसारियों का दुख दूर करके देखा जाता है. भक्तियुक्त मन ही ज्ञानाधिकारी होता है इसलिए भागवत, शिवपुराण आदि में ब्रह्मा जी से सृष्टि की उपयोगिता ज्ञानविज्ञान सुनते और जगत को चैतन्य करते दिखते हैं। इस अवसर पर  पंचम सिंह बिष्ट,  बीएस चौहान, कैलाश राम तिवारी, मूर्ति राम विजवान, दिनेश जुयाल,  बीपी शर्मा, अनूप सिंह फ़र्तियाल, मंगल सिंह कुट्टी, प्रेमलाल चमोली, वेद किशोर शर्मा, आशीष गुसांईं,  जयप्रकाश सेमवाल,  जयपाल सिंह बर्तवाल, चिंतामणि पुरोहित, आचार्य उदय प्रकाश नौटियाल, आचार्य सुशांत जोशी, आचार्य अखिलेश बधानी आदि उपस्थित थे।

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