ओम प्रकाश जोशी, देहरादून 3 अप्रैल । उत्तरांचल प्रेस क्लब, देहरादून में अपने सदस्यों को सम्मानित करने की गौरवशाली परंपरा के अंतर्गत शुक्रवार को एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें क्लब के सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार शीशपाल गुसाईं को “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान 2025” प्राप्त होने पर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया गया, जिसमें पत्रकारिता, साहित्य और अकादमिक जगत से जुड़े अनेक वरिष्ठ व्यक्तित्व उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय राणा ने की।
प्रेस क्लब की ओर से श्री गुसाईं को स्मृति चिन्ह, शॉल ओढ़ाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का प्रतीक था, बल्कि उत्तरांचल प्रेस क्लब की सामूहिक उपलब्धि के रूप में भी देखा गया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय राणा ने कहा कि यह क्लब के लिए गर्व का विषय है कि उसके एक सक्रिय सदस्य को राज्य स्तरीय प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में नए पत्रकारों की पढ़ने और लिखने में रुचि कम होती जा रही है, जो कि पत्रकारिता के भविष्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने युवा पत्रकारों से अध्ययन और लेखन की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
वरिष्ठ संपादक दिनेश शास्त्री ने अपने वक्तव्य में श्री गुसाईं के लेखन की सराहना करते हुए कहा कि उनके लेख शोधपूर्ण, तथ्यात्मक और इतिहास के प्रति गहरी समझ को दर्शाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से अल्मोड़ा जनपद में 30 वर्षों बाद लौटे महिपाल सिंह रजवार की कहानी को रामी बौराणी से जोड़ने वाले उनके लेख का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने एक अद्भुत साहित्यिक प्रस्तुति बताया।
साहित्यकार एवं प्रोफेसर सुशील उपाध्याय ने कहा कि प्रेस क्लब की यह परंपरा सराहनीय है, जिससे लेखन और शोध को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने श्री गुसाईं की कृति “मध्य हिमालय उत्तराखंड की ऐतिहासिक महिलाएं” का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह पुस्तक मुगल काल से लेकर वर्तमान तक की महिलाओं के योगदान को गहराई से प्रस्तुत करती है और यह शोधपरक साहित्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।
वरिष्ठ पत्रकार रवि बीएस नेगी ने कहा कि श्री गुसाईं के लेखन ने उन्हें टिहरी जनपद के भूगोल और इतिहास से गहराई से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि 15-20 वर्ष पूर्व तक जिन विषयों की जानकारी सीमित थी, आज वे उनके लेखन के माध्यम से व्यापक रूप से सामने आए हैं।
वरिष्ठ पत्रकार ज्योत्सना ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सहारा टीवी के समय से उनका श्री गुसाईं से जुड़ाव रहा है और उन्होंने गढ़वाल एवं टिहरी के इतिहास को उन्हीं के माध्यम से गहरी समझ के साथ समझा। उन्होंने कहा कि ऐसे लेखन से नई पीढ़ी को पढ़ने के लिए समृद्ध सामग्री मिलती है।
वरिष्ठ पत्रकार अरुण शर्मा ने भाषा संस्थान द्वारा दिए गए इस सम्मान को पूर्णतः मेरिट आधारित बताया। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मी प्रसाद बडोनी ने कहा कि इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में श्री गुसाईं का योगदान अद्वितीय है और उनके मौलिक लेख समाज के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज का कार्य करते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र डसीला ने कहा कि यह सम्मान न केवल श्री गुसाईं का, बल्कि पूरे प्रेस क्लब का सम्मान है। उन्होंने उनके लेखों के माध्यम से देहरादून के इतिहास के अनेक पहलुओं को जानने का उल्लेख किया, जैसे कर्णावती द्वारा बनाए गए मार्गों की ऐतिहासिक जानकारी।
वरिष्ठ पत्रकार दीपक फर्स्वाण ने कहा कि इस सम्मान से उत्तरांचल प्रेस क्लब की प्रतिष्ठा और साख में वृद्धि हुई है। उन्होंने शोध, इतिहास और पुरातत्व पर निरंतर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।
वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र अंथवाल ने कहा कि श्री गुसाईं के लेखन से उन्हें निरंतर नई जानकारी प्राप्त होती है। उन्होंने मियांवाला नाम परिवर्तन प्रकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि श्री गुसाईं के ऐतिहासिक तथ्यों के कारण उस नाम को यथावत बनाए रखने में सहायता मिली।
वरिष्ठ पत्रकार इंद्रभूषण बडोनी ने कहा कि यह खुशी की बात है कि शीशपाल गुसाई के पिता 75 वर्षीय राजपाल सिंह गुसाईं भी अमर उजाला के सक्रिय पत्रकार हैं और वह गांव में रहकर पत्रकारिता कर रहे हैं.
कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन लखेड़ा ने अपनी संबोधन में कहा कि लिखने पढ़ने की आदत युवा पीढ़ी छोड़ रही है मोबाइल के दौर में पठन-पाठन काम हो रहा है ऐसे वक्त में यदि गुसाईं कोई कृति लिखते हैं तो यह बहुत बड़ी बात है उन्होंने कहा कि उनके इतिहास एवं पुरातत्व के लेखन उन्हें नियमित व्हाट्सएप पर मिलते हैं जो अच्छी बात है.
समारोह के अंत में अपने संबोधन में शीशपाल गुसाईं ने यह सम्मान उत्तरांचल प्रेस क्लब के हर सदस्य, साहित्यकार, पत्रकार, लेखक, बुद्धिजीवी का है जिन से उन्होंने हर दिन कुछ न कुछ सीखा। उन्होंने कहा कि उनका लेखन इतिहास और पुरातत्व की खोज की एक सतत यात्रा है, जिसे वे आगे भी जारी रखेंगे। उन्होंने युवा लेखकों और पत्रकारों से आग्रह किया कि वे तथ्यों पर आधारित लेखन करें और सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास न करें। उन्होंने कहा, “सत्य वही है जो प्रमाणित हो, और हमें उसी सत्य की खोज में निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।”
प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय राणा ने कार्यक्रम का समापन आभार व्यक्त करने के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित अतिथियों और सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। यह सम्मान समारोह न केवल एक व्यक्ति के योगदान का उत्सव था, बल्कि पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बना।
कार्यक्रम का संचालन क्लब महामंत्री योगेश सेमवाल ने किया।
इस अवसर पर उत्तरांचल प्रेस क्लब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गजेंद्र सिंह नेगी, कोषाध्यक्ष मनीष डंगवाल, संयुक्त मंत्री मीना नेगी, संप्रेक्षक विजय जोशी, कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन लखेड़ा, रश्मि खत्री, मनोज सिंह जयाडा, हरीश थपलियाल, मनबर सिंह रावत, ओम प्रकाश जोशी, सुरेंद्र डसीला के साथ ही कई पत्रकार सदस्य मौजूद रहे।