:- 8 साल से लापता पति के बाद 5 बच्चों का बोझ उठा रही मीना ठाकुर को राहत :- परित्यक्ता अमृता जोशी के बेटे की पढ़ाई और इलाज में मदद के लिए प्रशासन आगे आया
मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून, 13 मार्च 2026।
जनपद में असहाय, पीड़ित और जरूरतमंद नागरिकों की सहायता के लिए जिला प्रशासन लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। जिलाधिकारी के मानवीय हस्तक्षेप से विपरीत परिस्थितियों से जूझ रही दो महिलाओं—मीना ठाकुर और अमृता जोशी—को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से 1-1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी द्वारा दोनों मामलों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसके बाद सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी गई।
8 वर्षों से लापता पति, पांच बच्चों की जिम्मेदारी अकेले उठा रहीं मीना
सुद्धोवाला निवासी मीना ठाकुर ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि उनके पति पिछले लगभग आठ वर्षों से लापता हैं और अब तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है। ऐसी स्थिति में मीना ठाकुर पर अपने पांच बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और परिवार की जिम्मेदारी अकेले आ गई है।
मीना ठाकुर के परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है, जिनमें दो बेटियां दिव्यांग हैं। किराये के मकान में रहकर सीमित संसाधनों में परिवार का गुजारा करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया था। विशेष रूप से दिव्यांग बेटियों की देखभाल और इलाज के कारण आर्थिक दबाव और बढ़ गया था।
जिलाधिकारी ने उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए CSR फंड से एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि मीना ठाकुर के परिवार को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिया जाए। उनकी तीन बेटियों की शिक्षा को “प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा” के माध्यम से पुनर्जीवित करने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
आर्थिक तंगी से जूझ रही अमृता जोशी को भी मिली राहत
खुड़बुड़ा क्षेत्र में किराये के मकान में रहने वाली परित्यक्ता महिला अमृता जोशी दूसरों के घरों में काम कर किसी तरह अपने दो बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। उनका बड़ा बेटा मानसिक विकार से ग्रस्त है, जिसके इलाज में लगातार खर्च हो रहा था।
आर्थिक तंगी के कारण कई महीनों से छोटे बेटे की स्कूल फीस जमा नहीं हो पाई, जिसके चलते स्कूल प्रबंधन ने उसे पढ़ाई से बाहर कर दिया। वहीं मकान का किराया न दे पाने के कारण मकान मालिक ने उन्हें घर से भी निकाल दिया।
अमृता जोशी ने अपनी समस्या जिलाधिकारी को बताई, जिसके बाद प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए CSR फंड से एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उनके बैंक खाते में स्थानांतरित करवाई।
इस सहायता से अब वह अपने बड़े बेटे का इलाज करा सकेंगी, छोटे बेटे की स्कूल फीस जमा कर पाएंगी और मकान का बकाया किराया भी चुका सकेंगी। साथ ही प्रशासन ने उन्हें स्वरोजगार के लिए भी प्रोत्साहित किया है ताकि परिवार के लिए स्थायी आय का स्रोत विकसित हो सके।
जरूरतमंदों की मदद को तत्पर जिला प्रशासन
जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन असहाय, दिव्यांग, महिला, बुजुर्ग और बच्चों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। जरूरतमंद लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन त्वरित और मानवीय कदम उठाता रहेगा।