उत्तराखंड कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने बोला तीखा हमला
मोनाल एक्सप्रेस, देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने देश में बढ़ते एलपीजी गैस और तेल संकट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे सरकार की अदूरदर्शी नीतियों का परिणाम बताते हुए आम जनता को हो रही परेशानी पर गंभीर चिंता जताई।
🔸 “गैस संकट से इनकार, लेकिन जमीनी हकीकत अलग”
डॉ. रावत ने कहा कि देशभर में एलपीजी गैस आपूर्ति को लेकर संकट जैसे हालात हैं, लेकिन सरकार इसे स्वीकार नहीं कर रही। उन्होंने आरोप लगाया कि गैस बुकिंग में शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं के बीच 25 और 45 दिन का अंतर तय कर सरकार खुद संकट की गंभीरता उजागर कर रही है।
🔸 “शहरी क्षेत्रों में भी ग्रामीण कोटे की बाध्यता”
उन्होंने कहा कि देहरादून समेत कई शहरों में ऐसी गैस एजेंसियां हैं जो अब नगर निगम क्षेत्रों में आ चुकी हैं, लेकिन उन्हें अब भी ग्रामीण श्रेणी में रखकर 45 दिन बाद बुकिंग की बाध्यता लागू की जा रही है।
👉 उन्होंने मांग की कि ऐसी एजेंसियों को तत्काल शहरी श्रेणी में लाकर 25 दिन की बुकिंग व्यवस्था लागू की जाए।
🔸 कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार घिरी
डॉ. रावत ने कहा कि गैस संकट के चलते सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी बढ़ रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन केवल बयानबाजी तक सीमित हैं।
🔸 “आयात निर्भरता बढ़ी, नीति विफल”
उन्होंने केंद्र की ऊर्जा नीति पर सवाल उठाते हुए कहा:
2014 में गैस आयात लगभग 47% था, जो अब बढ़कर 66% हो गया
तेल आयात 83% से बढ़कर 88% तक पहुंच गया
उनका कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के बजाय आयात पर निर्भरता बढ़ाई गई, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ा।
🔸 “विदेश नीति के कारण बढ़ा बोझ”
डॉ. रावत ने आरोप लगाया कि पहले भारत ईरान और खाड़ी देशों से सस्ता और जल्दी तेल-गैस प्राप्त करता था, लेकिन अब नीतिगत बदलाव के कारण अमेरिका से महंगा और देर से आने वाला ईंधन आयात किया जा रहा है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
🔴 विवेकाधीन कोष में अनियमितताओं का आरोप
प्रेस वार्ता में डॉ. रावत ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के दुरुपयोग का गंभीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि उधम सिंह नगर और चंपावत जिलों में कोष का दुरुपयोग सामने आया है।
👉 आरोपों के मुख्य बिंदु:
भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों और उनके परिजनों को लाभ
2 से 5 लाख रुपये तक की सहायता राशि का वितरण
कुछ मामलों में बिना नाम या अस्पष्ट विवरण के भुगतान
उन्होंने कहा कि यह केवल आंशिक जानकारी है और पूरी सूची सामने आने पर बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है।
🔸 निष्पक्ष जांच की मांग
डॉ. रावत ने मांग की कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
👥 प्रेस वार्ता में मौजूद
मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, वरिष्ठ नेता विनोद चौहान एवं दिनेश कौशल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।